लगातार खांसी को न करें नजरअंदाज, डॉक्टर की सलाह पर कराएं ये 3 टेस्ट
नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, गले में खराश और खांसी की समस्या आम हो जाती है। कई बार कुछ दिनों में खांसी अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे या दवा लेने के बाद भी आराम न मिले, तो इसकी वजह जानना जरूरी है। लगातार खांसी एलर्जी, वायरल संक्रमण, बैक्टीरियल संक्रमण, अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी किसी अन्य समस्या के कारण हो सकती है।
मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार, खांसी का इलाज करने से पहले उसके संभावित कारण का पता लगाना जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें चेस्ट एक्स-रे, सीबीसी ब्लड टेस्ट और सीआरपी टेस्ट शामिल हैं।
1. चेस्ट एक्स-रे से मिल सकती है फेफड़ों की जानकारी
लगातार खांसी होने पर डॉक्टर चेस्ट एक्स-रे कराने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच में फेफड़ों और छाती की तस्वीर ली जाती है, जिससे निमोनिया या फेफड़ों से जुड़ी कुछ अन्य असामान्यताओं का पता लगाने में मदद मिलती है।
कुछ मामलों में एक्स-रे से टीबी से जुड़ी असामान्यताओं का संदेह भी हो सकता है। हालांकि, केवल एक्स-रे के आधार पर टीबी की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बलगम की जांच या अन्य टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
अगर खांसी लंबे समय से बनी हुई है, बढ़ रही है या उसके साथ दूसरे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इस जांच की जरूरत तय करते हैं।
2. CBC टेस्ट से संक्रमण के संकेत मिल सकते हैं
सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड काउंट एक सामान्य रक्त जांच है। इसमें खून की विभिन्न कोशिकाओं, जैसे सफेद रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या का आकलन किया जाता है।
सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में बदलाव शरीर में संक्रमण या सूजन का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल सीबीसी के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल। इसके लिए मरीज के लक्षणों और दूसरी जांचों को भी ध्यान में रखा जाता है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार सीबीसी टेस्ट की मदद से मरीज की स्थिति का आकलन कर सकते हैं और आगे की जांच या उपचार तय कर सकते हैं।
3. CRP टेस्ट से सूजन का पता लगाने में मिलती है मदद
सीआरपी यानी सी-रिएक्टिव प्रोटीन एक ऐसा पदार्थ है, जिसका स्तर शरीर में सूजन होने पर बढ़ सकता है। खून की इस जांच से शरीर में चल रही सूजन के बारे में जानकारी मिलती है।
कुछ संक्रमणों में सीआरपी का स्तर बढ़ सकता है, लेकिन इसका बढ़ना अपने आप में किसी खास बीमारी की पुष्टि नहीं करता। इसी तरह, सामान्य सीआरपी स्तर होने से हर बीमारी की संभावना खत्म नहीं हो जाती।
डॉक्टर मरीज के लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य टेस्ट के साथ सीआरपी रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हैं। हर मरीज को यह जांच कराना जरूरी नहीं होता।
कितने दिन तक खांसी रहने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

सर्दी-जुकाम के बाद खांसी कुछ समय तक बनी रह सकती है। लेकिन अगर खांसी लगातार बढ़ रही है, दो से तीन सप्ताह तक ठीक नहीं हो रही या बार-बार लौट रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है। कुछ परिस्थितियों में इससे पहले भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
अगर खांसी के साथ खून आए, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में तेज दर्द हो, लगातार बुखार रहे या बिना वजह वजन घटे, तो इसे नजरअंदाज न करें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
खांसी में खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी
खांसी होने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप, एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं लेने लगते हैं। ऐसा करना सही नहीं है, क्योंकि खांसी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं और हर कारण का उपचार एक जैसा नहीं होता।
एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण में फायदा नहीं करतीं और उनका अनावश्यक इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह, कफ सिरप का चुनाव भी मरीज की उम्र, लक्षणों और दूसरी दवाओं के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
याद रखें: चेस्ट एक्स-रे, सीबीसी और सीआरपी संभावित रूप से उपयोगी जांच हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इन तीनों की जरूरत नहीं होती। लगातार खांसी का सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।