पैक्ड फ्रूट जूस से बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा? जानें वजह

हेल्थ डेस्क। बाजार में मिलने वाले पैक्ड फ्रूट जूस को कई लोग सेहत के लिए अच्छा विकल्प मानते हैं। खासकर जब पैकेट पर फ्रूट, नेचुरल या हेल्दी जैसे शब्द लिखे हों, तो लोग इसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर लेते हैं। लेकिन अगर आप नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में मीठा पैक्ड जूस पीते हैं, तो यह आदत आपकी सेहत पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक शुगर और फ्रुक्टोज वाले पेय पदार्थों का लंबे समय तक ज्यादा सेवन लिवर में फैट जमा होने के जोखिम को बढ़ा सकता है।

फैटी लिवर की समस्या में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं भी आते, इसलिए कई लोगों को लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं होती। हालांकि, केवल पैक्ड जूस को फैटी लिवर का एकमात्र कारण मानना सही नहीं है। खानपान, वजन, शारीरिक गतिविधि, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

पैक्ड फ्रूट जूस में ऐसा क्या होता है?

फ्रूट जूस में प्राकृतिक रूप से शुगर मौजूद हो सकती है। कुछ उत्पादों में अतिरिक्त शुगर, फ्रुक्टोज या दूसरे मीठे तत्व भी मिलाए जाते हैं। इनकी मात्रा उत्पाद के प्रकार और बनाने की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से ज्यादा मीठे पेय पदार्थ पीता है, तो उसके शरीर में शुगर और कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। लिवर फ्रुक्टोज के मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। अधिक मात्रा में फ्रुक्टोज का सेवन शरीर में फैट बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है, जिससे कुछ लोगों में लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर पैक्ड जूस में अतिरिक्त शुगर होती है या एक गिलास जूस पीने से फैटी लिवर हो जाएगा। इसके लिए उत्पाद की सामग्री, सेवन की मात्रा और व्यक्ति की संपूर्ण जीवनशैली को समझना जरूरी है।

साबुत फल और जूस में क्या है अंतर?

फल खाना और उसी फल का जूस पीना पोषण के लिहाज से एक जैसा नहीं है। साबुत फल में फाइबर मौजूद रहता है, जो पेट भरा होने का एहसास बढ़ाने और शुगर के अवशोषण को धीमा करने में मदद करता है।

जूस बनाने के दौरान फल का काफी फाइबर निकल सकता है। इसके अलावा, एक गिलास जूस बनाने में कई फलों का इस्तेमाल हो सकता है, जिससे कम समय में ज्यादा मात्रा में शुगर और कैलोरी का सेवन हो जाता है।

उदाहरण के लिए, संतरा खाने में आपको चबाना पड़ता है और उसका फाइबर भी मिलता है। लेकिन संतरे का जूस जल्दी पी लिया जाता है और उससे उतना पेट भरा हुआ महसूस नहीं हो सकता। इस कारण साबुत फल खाने के बजाय बार-बार जूस पीना कुल शुगर सेवन बढ़ा सकता है।

इसी वजह से रोजमर्रा की डाइट में जूस के मुकाबले साबुत फलों को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जाता है।

क्या ‘नेचुरल’ या ‘फ्रूट’ लिखे होने का मतलब है कि जूस हेल्दी है?

किसी पैकेट पर फ्रूट या नेचुरल लिखा होना अपने आप में यह गारंटी नहीं है कि उत्पाद में शुगर कम है। जूस खरीदते समय उसके सामने लिखे दावों के साथ पीछे दिया गया न्यूट्रिशन लेबल और सामग्री की सूची भी देखनी चाहिए।

खरीदारी के दौरान इन बातों पर ध्यान दें:

  • कुल शुगर: प्रति 100 मिलीलीटर और पूरी सर्विंग में कितनी शुगर है, यह देखें।
  • अतिरिक्त शुगर: सामग्री की सूची में चीनी, सिरप या अन्य मीठे तत्वों की मौजूदगी जांचें।
  • फ्रूट कंटेंट: उत्पाद में वास्तविक फल का कितना हिस्सा है और वह किस प्रकार का पेय है, इसकी जानकारी पढ़ें।
  • सर्विंग साइज: पैकेट में मौजूद पूरी मात्रा को एक सर्विंग मानने से पहले पोषण संबंधी जानकारी जांचें।

ध्यान रखें कि बिना अतिरिक्त शुगर वाले जूस में भी फलों से प्राकृतिक रूप से आई शुगर हो सकती है। इसलिए केवल ‘नो एडेड शुगर’ लिखा देखकर यह न मानें कि उसमें शुगर बिल्कुल नहीं है।

फैटी लिवर से बचने के लिए क्या करें?

लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए केवल एक खाद्य पदार्थ छोड़ना पर्याप्त नहीं है। संपूर्ण खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।

1. साबुत फल खाएं: जूस के बजाय मौसमी फल खाने की आदत बनाएं। इससे फाइबर मिलता है और पेट भरा रहने में मदद मिलती है।

2. मीठे पेय पदार्थ सीमित करें: पैक्ड जूस, मीठे कोल्ड ड्रिंक और अन्य शुगर वाले पेय नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में लेने से बचें।

3. पानी को प्राथमिकता दें: सामान्य दिनों में प्यास बुझाने के लिए पानी एक अच्छा विकल्प है। जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी पिएं।

4. संतुलित भोजन लें: सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। कुल कैलोरी और शुगर के सेवन पर भी ध्यान दें।

5. नियमित शारीरिक गतिविधि करें: पैदल चलना और नियमित व्यायाम वजन तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

फैटी लिवर के लक्षण न हों, तब भी रहें सतर्क

फैटी लिवर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। कुछ लोगों को थकान या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन इन लक्षणों से अकेले बीमारी की पुष्टि नहीं होती।

अगर किसी व्यक्ति को पहले से फैटी लिवर, डायबिटीज, मोटापा या अन्य मेटाबॉलिक समस्या है, तो उसे अपने खानपान को लेकर डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष: पैक्ड फ्रूट जूस को रोजाना बड़ी मात्रा में पीना, खासकर जब उसमें शुगर ज्यादा हो, लिवर की सेहत के लिए अच्छा विकल्प नहीं हो सकता। लेकिन फैटी लिवर का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। बेहतर आदत यही है कि साबुत फलों को प्राथमिकता दें, मीठे पेय पदार्थ सीमित रखें और संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

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