Copper Deficiency: कॉपर के फायदे और कमी पूरी करने वाले फूड्स
हेल्थ डेस्क। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए केवल विटामिन ही नहीं, बल्कि कई जरूरी मिनरल्स की भी आवश्यकता होती है। इन्हीं में से एक है कॉपर (तांबा)। शरीर को इसकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन यह कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में योगदान देता है।
कॉपर शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, आयरन के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा उत्पादन, तंत्रिका तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता के सामान्य कामकाज में मदद करता है। इसकी कमी आमतौर पर दुर्लभ होती है, लेकिन गंभीर कमी होने पर सेहत पर असर पड़ सकता है।
1. लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मददगार
कॉपर शरीर को आयरन का सही तरीके से उपयोग करने में मदद करता है। आयरन और कॉपर दोनों ही रक्त से जुड़ी कई प्रक्रियाओं के लिए जरूरी हैं। कॉपर की गंभीर कमी होने पर कुछ लोगों में एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या हो सकती है।
2. इम्युनिटी के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को ठीक से काम करने के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। कॉपर भी उनमें शामिल है। इसकी कमी होने पर सफेद रक्त कोशिकाओं, खासकर न्यूट्रोफिल, का स्तर प्रभावित हो सकता है। ये कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
3. दिल और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में भूमिका
कॉपर कई ऐसे एंजाइमों का हिस्सा है, जो शरीर में ऊर्जा उत्पादन और अन्य जैविक प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं। इसकी कमी को कुछ अध्ययनों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के साथ जोड़ा गया है।
हालांकि, कॉपर को अधिक मात्रा में लेने से हृदय रोगों से बचाव होता है, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
4. हड्डियों और शरीर के ऊतकों के लिए महत्वपूर्ण
कॉपर उन एंजाइमों के काम में मदद करता है, जो कोलेजन और इलास्टिन जैसे प्रोटीन के निर्माण और रखरखाव में योगदान देते हैं। ये प्रोटीन त्वचा, हड्डियों और शरीर के संयोजी ऊतकों की संरचना के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कॉपर शरीर में सामान्य तंत्रिका कार्य और मस्तिष्क के विकास से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है।
5. कॉपर की कमी के क्या संकेत हो सकते हैं?
कॉपर की कमी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। गंभीर कमी होने पर कुछ संभावित संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- एनीमिया या लगातार थकान
- सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होना
- बार-बार संक्रमण होने की आशंका बढ़ना
- कुछ मामलों में हड्डियों या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं
इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर कॉपर की कमी मान लेना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
6. किन खाद्य पदार्थों से मिलता है कॉपर?
कॉपर की दैनिक जरूरत पूरी करने के लिए संतुलित आहार में कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
- मेवे और बीज: काजू, सूरजमुखी के बीज और तिल
- दालें और अनाज: चना, साबुत अनाज और बाजरा
- सब्जियां: मशरूम, पालक और आलू
- फल: एवोकाडो और कुछ अन्य फल
- अन्य स्रोत: डार्क चॉकलेट, मछली और समुद्री खाद्य पदार्थ
इन खाद्य पदार्थों में कॉपर की मात्रा अलग-अलग होती है। रोजाना विविध और संतुलित आहार लेने से आमतौर पर शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

रोजाना कितने कॉपर की जरूरत होती है?
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, वयस्क पुरुषों और महिलाओं के लिए कॉपर की अनुशंसित दैनिक मात्रा 900 माइक्रोग्राम है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान जरूरत अलग हो सकती है।
कॉपर की अधिक मात्रा भी नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कॉपर सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है, खासकर तब जब किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी हो या वह अन्य दवाएं ले रहा हो।
क्या तांबे के बर्तन में रखा पानी कॉपर की कमी दूर करता है?
तांबे के बर्तन में रखे पानी में कुछ मात्रा में कॉपर घुल सकता है, लेकिन इसकी मात्रा पानी और बर्तन की स्थिति पर निर्भर करती है। इसे कॉपर की कमी दूर करने का निश्चित या चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष: कॉपर कम मात्रा में जरूरी होने के बावजूद शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में योगदान देता है। इसकी जरूरत पूरी करने के लिए संतुलित आहार अपनाना बेहतर है। यदि कमी का संदेह हो, तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।