IMF की भारत को सलाह: रुपये को वैश्विक झटकों के अनुसार बदलने दें, ECB प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड देंगी पद छोड़ेंगी

IMF की रुपये पर सलाह और ECB प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड के इस्तीफे की खबर
वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को ऊर्जा संकट के असर से निपटने के लिए रुपये की विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखने की सलाह दी है। दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने 7 फरवरी 2027 को पद छोड़ने का ऐलान किया है। इन घटनाक्रमों के बीच भारतीय रुपये, RBI की विदेशी मुद्रा नीतियों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
IMF ने रुपये को लेकर क्या कहा?
IMF की रुपये को लेकर सलाह में कहा गया है कि भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए विनिमय दर को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समायोजित होने देना चाहिए। IMF की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूली कोजैक ने कहा कि रुपये को ऊर्जा संकट जैसे झटकों के सामने पहली सुरक्षा पंक्ति की तरह काम करने देना अर्थव्यवस्था के लिए मददगार हो सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रुपये में गिरावट का असर देश की महंगाई पर व्यापक रूप से दिखाई देने लगे, तो मौद्रिक नीति को सख्त करने पर विचार किया जा सकता है।
RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार के लिए उठाए कदम
भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम को नियंत्रित करने के लिए अक्टूबर में कई कदम उठाए। इनमें सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था और कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर नियमों को सख्त करना शामिल है।
RBI की विदेशी मुद्रा बाजार नीति के तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष विंडो बनाई गई। इसके साथ ही, कुछ ऐसे डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाई गई जिनमें वास्तविक कारोबारी जरूरत से जुड़ा आधार उपलब्ध नहीं होता।

क्रिस्टीन लगार्ड ने क्यों लिया पद छोड़ने का फैसला?
क्रिस्टीन लगार्ड का इस्तीफा 7 फरवरी 2027 से प्रभावी होगा। ECB की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, उन्होंने 29 अक्टूबर को अपने फैसले की जानकारी ECB गवर्निंग काउंसिल और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को दी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, लगार्ड ने कहा कि पद छोड़ने के बाद वह मौद्रिक नीति से आगे के वैश्विक मुद्दों पर अधिक स्वतंत्रता से बोल और काम कर सकेंगी। उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2027 में समाप्त होना था। उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति यूरोपीय परिषद करेगी।
कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए क्यों अहम?
भारत की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपये की विनिमय दर से प्रभावित होती है। तेल महंगा होने और रुपया कमजोर होने पर आयात की लागत बढ़ सकती है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन और अन्य क्षेत्रों की लागत पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार, रुपये की चाल और RBI के कदम भारतीय वित्तीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।




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