महाकाल लोक में NSG की मॉक ड्रिल, 150 कमांडो ने परखी सुरक्षा
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक की सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की टीम ने रात में विशेष मॉक ड्रिल की। करीब 150 कमांडो इस अभ्यास में शामिल हुए। बुलेटप्रूफ वाहनों और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस जवानों ने संभावित आपात परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास किया।
रात 11 बजे शुरू हुआ सुरक्षा अभ्यास
यह मॉक ड्रिल गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात आयोजित की गई। अभ्यास रात करीब 11 बजे शुरू होकर तड़के 2 बजे तक चला। NSG के कमांडो महाकाल लोक के नंदी द्वार पहुंचे, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें ऑपरेशन से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी।
इसके बाद जवानों ने महाकाल लोक के अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर पहुंचकर सुरक्षा संबंधी अभ्यास किया।
मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम तक अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान कमांडो ने मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के बीच विभिन्न स्थानों पर मोर्चा संभाला। अभ्यास में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखा गया।
इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य यह जांचना होता है कि किसी अप्रत्याशित स्थिति में सुरक्षा बल कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं और अलग-अलग एजेंसियां मिलकर किस तरह काम करती हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के तालमेल की भी हुई जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों की तत्परता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय का आकलन करना था।
अभ्यास के जरिए आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता को भी परखा गया, ताकि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकें।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा क्यों है अहम?
महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर और महाकाल लोक की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
NSG की यह मॉक ड्रिल संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने की दिशा में आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य किसी वास्तविक खतरे की सूचना देना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की तैयारी और समन्वय को परखना था।