यूरोप में विरोध प्रदर्शन तेज, इटली में सख्त कानून; फ्रांस में कर्फ्यू
वर्ल्ड डेस्क। यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे ईंधन, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस और इटली में प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़पों, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, अल्बानिया में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। हालात को देखते हुए कई देशों की सरकारें सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रही हैं।
इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं। उनकी प्रमुख मांगों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के अवसर, किफायती आवास और बढ़ती जीवन-यापन लागत से राहत शामिल हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों में आंदोलन के स्थानीय कारण भी हैं।
फ्रांस में हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था सख्त
फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन व्यापक असंतोष में बदल गए हैं। महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर आर्थिक दबाव के मुद्दे भी आंदोलन से जुड़ गए हैं।
शनिवार को हुए प्रदर्शनों में फ्रांस के अधिकारियों के अनुसार लगभग 5.5 लाख लोग शामिल हुए। पेरिस में ही करीब 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर हिंसा, दुकानों में लूटपाट और वाहनों को आग लगाने की घटनाएं हुईं।
इसके बाद प्रशासन ने पेरिस, नीस और कुछ अन्य शहरों में प्रतिबंधात्मक कदम उठाए। मार्सिले में नाबालिगों की रात में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। फ्रांसीसी सरकार ने आगामी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की तैयारी की है।
इटली में मिलान के लिए 500 सैनिक तैनात करने की तैयारी
इटली में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। मिलान सहित कई शहरों में कुछ प्रदर्शन हिंसक हो गए। पुलिस के साथ झड़पों, दुकानों में लूटपाट और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार मिलान में 500 सैनिकों की तैनाती की योजना बना रही है। इसके अलावा, हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए नए सुरक्षा उपायों की घोषणा की गई है।
प्रस्तावित कदमों में हिंसक प्रदर्शन में भागीदारी पर दंड, दंगों के लिए कड़ी सजा और तोड़फोड़ या लूटपाट में शामिल नाबालिगों के मामलों में माता-पिता की वित्तीय जिम्मेदारी तय करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कठोर कदम जरूरी हैं। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को बनाए रखने की मांग भी उठ रही है।
अल्बानिया में आठवें दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प

अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी जारी रहे। छात्र आंदोलन से शुरू हुआ विरोध अब व्यापक राजनीतिक असंतोष से जुड़ गया है। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारना, ट्यूशन फीस कम करना, शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करना शामिल है। युवाओं में रोजगार के सीमित अवसरों और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी नाराजगी की वजह है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थर, पटाखे और अन्य वस्तुएं फेंके जाने की खबरें भी सामने आईं।
प्रधानमंत्री एदी रामा ने हिंसा की आलोचना की है। सरकार का कहना है कि वास्तविक सामाजिक और आर्थिक चिंताओं का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों में बदलाव की मांग पर कायम हैं।
पुर्तगाल में आवास संकट के खिलाफ आंदोलन
पुर्तगाल में बढ़ते किराये और घर खरीदने की मुश्किलों के कारण लोगों का असंतोष बढ़ रहा है। लिस्बन और पोर्टो में कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर तंबू लगाकर आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया।
20 अक्टूबर को पुलिस ने लिस्बन और पोर्टो में लगाए गए विरोध शिविरों को हटाने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान 55 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है।
प्रदर्शनकारी सरकार से ऐसी नीतियां वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिनसे उनके अनुसार किरायेदारों को घर से निकालना आसान हो सकता है और नए किरायों पर नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।
आवास की बढ़ती लागत का दबाव स्पेन में भी दिखाई दे रहा है। वहां कई शहरों में लोग किफायती घरों और किराये में राहत की मांग कर रहे हैं।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा है असंतोष?
यूरोप में चल रहे आंदोलनों के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण हैं। महंगाई से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है, जबकि युवाओं के लिए किफायती आवास और स्थायी रोजगार पाना मुश्किल हो रहा है। कुछ देशों में शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता भी विरोध का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
हालांकि, हर देश में विरोध की वजह एक जैसी नहीं है। फ्रांस में शिक्षा और जीवन-यापन की लागत, इटली में वेतन और सार्वजनिक सेवाएं, पुर्तगाल व स्पेन में आवास संकट तथा अल्बानिया में भ्रष्टाचार और शिक्षा से जुड़े सवाल प्रमुख हैं।
कई जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के साथ हिंसक घटनाएं भी हुई हैं। ऐसे में सरकारों के सामने दोहरी चुनौती है—कानून-व्यवस्था बनाए रखना और उन आर्थिक-सामाजिक समस्याओं का समाधान करना, जिनके कारण लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
यूरोप के विभिन्न देशों में आने वाले दिनों में और प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। इटली में शनिवार को फिर बड़े विरोध प्रदर्शन होने की योजना है, जबकि फ्रांस में प्रशासन सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
सरकारों की सख्त कार्रवाई से हिंसा पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन महंगाई, आवास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना भी जरूरी होगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि सुरक्षा उपायों के साथ सरकारें प्रदर्शनकारियों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।