Meta Smart Glasses: प्राइवेसी विवाद और वैश्विक प्रतिबंधों पर चर्चा
टेक डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस स्मार्ट चश्मे आधुनिक तकनीक का नया रूप हैं। ये सामान्य चश्मों जैसे दिखते हैं, लेकिन इनमें कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर और AI असिस्टेंट जैसी सुविधाएं हो सकती हैं। इनसे फोन निकाले बिना फोटो लेना, वीडियो रिकॉर्ड करना, कॉल करना और AI से सवाल पूछना संभव है। हालांकि, रिकॉर्डिंग की सुविधा ने अब लोगों की निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि एक उद्योगपति ने मेटा स्मार्ट चश्मे से उनकी और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की बातचीत रिकॉर्ड करने की कोशिश की। इस दावे के बाद स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग से जुड़े नियमों पर फिर चर्चा शुरू हो गई।
Meta Ray-Ban स्मार्ट चश्मे कैसे काम करते हैं?
Meta Ray-Ban स्मार्ट चश्मे मेटा और रे-बैन की साझेदारी से तैयार किए गए हैं। अलग-अलग मॉडल में कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर की सुविधाएं अलग हो सकती हैं। इनकी मदद से उपयोगकर्ता फोटो और वीडियो बना सकते हैं, कॉल कर सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं और वॉयस कमांड के जरिए AI असिस्टेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इन सुविधाओं के कारण कई काम हाथों को खाली रखकर किए जा सकते हैं। लेकिन चश्मे का सामान्य डिजाइन आसपास मौजूद लोगों के लिए यह पहचानना कठिन बना सकता है कि रिकॉर्डिंग चल रही है या नहीं।
क्या बिना जानकारी के रिकॉर्डिंग हो सकती है?
मेटा का कहना है कि उसके कैमरा-सक्षम AI चश्मों में रिकॉर्डिंग के दौरान सामने की ओर लगी LED लाइट संकेत देती है। कंपनी के अनुसार, यह लाइट फोटो या वीडियो कैप्चर किए जाने की जानकारी देने के लिए बनाई गई है।
हालांकि, यूरोपीय डेटा संरक्षण बोर्ड ने चेतावनी दी है कि सामान्य चश्मे जैसे दिखने वाले उपकरणों से लोगों को यह पता नहीं चल सकता कि उनकी तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड हो रही है। नियामक ने रिकॉर्डिंग के स्पष्ट संकेत और संवेदनशील स्थानों में विशेष सावधानी की जरूरत बताई है।
अक्टूबर 2026 में कुछ उपयोगकर्ताओं ने बिना स्पष्ट वॉयस कमांड के ऑडियो लॉग और AI बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट दिखाई देने की शिकायत की थी। मेटा ने 13 अक्टूबर को बताया कि संबंधित समस्या ठीक कर दी गई है। इन शिकायतों से प्रभावित उपकरणों की कुल संख्या और तकनीकी कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए।
किन देशों में स्मार्ट चश्मों पर नियम सख्त हो रहे हैं?
स्मार्ट चश्मों पर वैश्विक प्रतिबंध को लेकर अलग-अलग देशों और संस्थानों में चर्चा चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया सरकारी कार्यस्थलों में कैमरा-सक्षम चश्मों पर संभावित रोक का आकलन कर रहा है। नॉर्वे ने स्कूलों जैसे कुछ स्थानों पर सीमाएं लागू की हैं और अन्य सार्वजनिक स्थानों के लिए भी उपायों पर विचार किया जा रहा है।
अमेरिका में न्यूयॉर्क की अदालतों में रिकॉर्डिंग-सक्षम स्मार्ट चश्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया गया है। यूरोप में डेटा संरक्षण नियामक रिकॉर्डिंग के स्पष्ट संकेत, लोगों की जानकारी और संवेदनशील स्थानों में सुरक्षा उपायों पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, इन कदमों का अर्थ यह नहीं है कि सभी देशों में स्मार्ट चश्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

स्मार्ट चश्मों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल क्यों जरूरी?
स्मार्ट चश्मे उपयोगी तकनीक हो सकते हैं, लेकिन किसी की निजी बातचीत, तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड करने से निजता और कानूनी अधिकारों से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। अस्पतालों, स्कूलों, कार्यालयों और अन्य संवेदनशील स्थानों में इनका इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
तकनीकी कंपनियों को रिकॉर्डिंग के स्पष्ट संकेत और डेटा सुरक्षा को बेहतर बनाना होगा। वहीं, उपयोगकर्ताओं को स्थानीय कानूनों का पालन करते हुए दूसरे लोगों की निजता और सहमति का सम्मान करना चाहिए। तकनीक का लाभ तभी व्यापक रूप से मिल सकता है, जब सुविधा के साथ पारदर्शिता और जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो।