महाराष्ट्र पुलिस ने धर्मांतरण के एक चौंकाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खबर यह है कि आरोपियों ने प्रतिष्ठित IT कंपनी TCS (Tata Consultancy Services) के नाम का गलत इस्तेमाल कर इस पूरे रैकेट को अंजाम दिया। पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में 7 महिला पुलिसकर्मियों को अंडरकवर एजेंट बनाकर कंपनी के अंदर भेजा और गिरोह का भंडाफोड़ किया।

TCS के नाम का हुआ दुरुपयोग

​शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने TCS जैसी नामी कंपनी के साथ काम करने का झांसा देकर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया। गिरोह के सदस्य खुद को कंपनी से जुड़ा बताकर या कंपनी परिसर के आसपास सक्रिय रहकर लोगों को निशाना बनाते थे। इनका मुख्य उद्देश्य करियर और पैसे का लालच देकर लोगों का ब्रेनवाश करना और उन्हें धर्मांतरण के लिए उकसाना था।

मिशन ‘अंडरकवर’: 7 जांबाज महिला पुलिसकर्मी

​जब पुलिस को इस रैकेट की भनक लगी, तो सबूत जुटाना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए पुणे पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई:

  • कर्मचारी बनकर एंट्री: 7 महिला पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान छिपाई और खुद को IT प्रोफेशनल बताकर कंपनी में शामिल हुईं।
  • गुप्त निगरानी: कई दिनों तक इन अधिकारियों ने आम कर्मचारियों की तरह काम किया और गिरोह की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा।
  • रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने या प्रलोभन देने के पुख्ता सबूत मिले, पुलिस ने रेड मारकर मुख्य आरोपियों को दबोच लिया।

धर्मांतरण के लिए अपनाए गए हथकंडे

​पुलिस के अनुसार, यह रैकेट काफी संगठित तरीके से चल रहा था:

  1. आर्थिक लालच: बेरोजगार या कम वेतन पाने वाले युवाओं को बेहतर भविष्य और मोटी रकम का वादा किया जाता था।
  2. मानसिक दबाव: कर्मचारियों के मन में उनके मूल धर्म के प्रति हीन भावना पैदा कर उनका मानसिक ब्रेनवॉश किया जाता था।
  3. विदेशी कनेक्शन: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय फंडिंग या बड़ा नेटवर्क शामिल है।

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