Russia Economy: यूक्रेन युद्ध का बढ़ता खर्च, पुतिन सरकार नए टैक्स से जुटाएगी राजस्व

Russia Economy: यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन सरकार के नए टैक्स प्रस्ताव
रूस की अर्थव्यवस्था पर यूक्रेन युद्ध का वित्तीय दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। सैन्य खर्च में वृद्धि, धीमी आर्थिक वृद्धि और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए नए कर प्रस्ताव लेकर आई है। इन प्रस्तावों में खनन कंपनियों, निवेश से आय अर्जित करने वाले लोगों और विदेशी ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े कर शामिल हैं।
रूस का बजट घाटा तय लक्ष्य से आगे
एसोसिएटेड प्रेस की 29 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त तक रूस का बजट घाटा 5.8 ट्रिलियन रूबल यानी करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक था और सरकार के संशोधित लक्ष्य को भी पार कर गया।
बढ़ते सैन्य खर्च के अलावा पश्चिमी प्रतिबंध, ऊंची ब्याज दरें, श्रमिकों की कमी और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों ने भी सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ाया है।
किन लोगों और कंपनियों पर पड़ेगा असर?
सरकार के 2027-2029 के बजट प्रस्तावों में कई नए कर शामिल हैं। खनन कंपनियों पर प्रस्तावित टैक्स के तहत लौह अयस्क, निकेल और सोने से जुड़ी कंपनियों के असाधारण मुनाफे पर 20 से 30 प्रतिशत तक कर लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, निवेश से होने वाली आय पर टैक्स की दरें बढ़ाकर 13 से 22 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसमें बैंक जमा पर ब्याज, डिविडेंड और संपत्ति की बिक्री से मिलने वाली कुछ आय शामिल है।
विदेशी ऑनलाइन खरीदारी के लिए भी नए शुल्क प्रस्तावित हैं। 200 यूरो से कम मूल्य के कुछ विदेशी पार्सल पर 100 रूबल शुल्क और 22 प्रतिशत वैट लगाने की योजना है। कुछ प्रतिबंधित खातों में विदेशी निवेशकों को दिए जाने वाले डिविडेंड पर 35 प्रतिशत कर का प्रस्ताव भी सामने आया है।
क्या रूस के पास युद्ध खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस निकट भविष्य में बजट घाटे को वित्तपोषित कर सकता है, लेकिन इसकी कीमत कारोबार और परिवारों को अधिक करों तथा बढ़ती लागत के रूप में चुकानी पड़ सकती है। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों से धन जुटाने के विकल्प भी सीमित हैं।
रूस घरेलू बैंकों से उधारी और अपने नेशनल वेल्थ फंड के संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध तरल भंडार में कमी आने से भविष्य में सरकार की वित्तीय गुंजाइश सीमित हो सकती है।

नागरिक अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सरकारी खर्च का सैन्य क्षेत्र की ओर अधिक झुकाव नागरिक विकास और बुनियादी ढांचे के लिए उपलब्ध धन को कम कर सकता है। रूस की अर्थव्यवस्था तत्काल वित्तीय संकट में नहीं मानी जा रही, लेकिन लंबे समय तक युद्ध जारी रहने से वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
आने वाले समय में ऊर्जा की वैश्विक कीमतें, सरकारी राजस्व और प्रतिबंधों का असर रूस की आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। नए टैक्स प्रस्ताव सरकार को अतिरिक्त आय दे सकते हैं, लेकिन इनके कारण कारोबारियों और नागरिकों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
नोट: लेख में बताए गए नए कर बजट प्रस्तावों का हिस्सा हैं। इनके अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति में बदलाव संभव है।




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