Barrier Free Toll Plaza: 400 टोल प्लाजा पर नई तकनीक की तैयारी
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को आसान बनाने के लिए टोल वसूली की तकनीक में बदलाव किया जा रहा है। बैरियर-मुक्त टोलिंग प्रणाली के जरिए वाहनों से बिना रोके इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शुल्क वसूलने की योजना है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, साल के अंत तक देश के करीब 400 टोल प्लाजा को इस व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य बताया गया है। सरकार इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है।
कैमरे और FASTag से होगी टोल वसूली
नई व्यवस्था को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) कहा जाता है। इसमें सड़क के ऊपर लगाए गए कैमरे और उपकरण वाहनों की नंबर प्लेट पहचानते हैं। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक और FASTag की मदद से वाहन की पहचान तथा टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
इस प्रणाली का उद्देश्य टोल बैरियर पर रुकने की जरूरत खत्म करना है। वाहन सामान्य गति से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे और शुल्क इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वसूला जाएगा।
जाम और ईंधन की खपत कम करने की कोशिश
पारंपरिक टोल प्लाजा पर वाहनों की कतारों के कारण यात्रियों को इंतजार करना पड़ सकता है। बैरियर-मुक्त प्रणाली से इस परेशानी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय बच सकता है और बार-बार रुकने से होने वाली ईंधन की खपत तथा प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
इसके साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था टोल संग्रह को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद कर सकती है। NHAI देश के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहा है।

वाहन चालकों को FASTag के बारे में क्या ध्यान रखना चाहिए?
नई व्यवस्था में FASTag सक्रिय होना और उसमें पर्याप्त बैलेंस रहना महत्वपूर्ण है। वाहन की नंबर प्लेट साफ और सही तरीके से दर्ज होना भी जरूरी है, ताकि कैमरे उसकी पहचान कर सकें।
यदि टोल शुल्क का भुगतान सफल नहीं होता, तो लागू नियमों के तहत वाहन मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किया जा सकता है। इसलिए यात्रा से पहले FASTag की स्थिति और बैलेंस जांच लेना बेहतर रहेगा।
सभी टोल प्लाजा पर एक साथ लागू नहीं होगी तकनीक
बैरियर-मुक्त टोलिंग का विस्तार अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। इसलिए देश के हर टोल प्लाजा पर तत्काल यह सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यात्रियों को अपने मार्ग के टोल प्लाजा पर लागू व्यवस्था की जानकारी संबंधित आधिकारिक स्रोतों से जांचनी चाहिए।
यह तकनीक राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली की प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।