Serbia Election 2026: छात्र आंदोलन की जीत, वुसिक ने मानी हार
बेलग्रेड। सर्बिया में करीब दो साल से चल रहे छात्र आंदोलन को संसदीय चुनाव में बड़ी सफलता मिली है। देश के लंबे समय से प्रभावशाली नेता अलेक्जेंडर वुसिक ने 25 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव में अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, छात्र समर्थित स्टूडेंट लिस्ट को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी को लगभग 105 सीटें मिलने का अनुमान है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से चुनावी जीत तक
सर्बिया में छात्र प्रदर्शनों ने नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छतरी गिरने की घटना के बाद जोर पकड़ा था। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने कथित भ्रष्टाचार, निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और सरकारी जवाबदेही को लेकर विरोध शुरू किया।
लगभग दो साल तक चले प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में व्यापक बहस पैदा की। आंदोलन से जुड़े लोगों ने पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की मांग की। बाद में छात्र समर्थित राजनीतिक सूची ने चुनाव में हिस्सा लिया और सत्तारूढ़ दल को चुनौती दी।

वुसिक ने स्वीकार की हार
चुनाव के बाद अलेक्जेंडर वुसिक ने कहा कि उनकी पार्टी हार गई है और स्टूडेंट लिस्ट ने जीत हासिल की है। उनके बताए शुरुआती अनुमान के मुताबिक, छात्र समर्थित सूची को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं।
वुसिक 2014 से प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के रूप में सर्बिया की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं। संसदीय चुनाव में उनकी पार्टी की हार को उनके राजनीतिक प्रभाव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
हालांकि, संसदीय चुनाव में हार का अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति तत्काल पद छोड़ देते हैं। राष्ट्रपति पद और सरकार गठन से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाएं अलग हैं। आगे की स्थिति आधिकारिक परिणामों और राजनीतिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
स्टूडेंट लिस्ट के सामने अब शासन की चुनौती
चुनावी सफलता के बाद छात्र समर्थित गठबंधन के सामने अपनी मांगों को नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में बदलने की चुनौती होगी। भ्रष्टाचार की जांच, सरकारी संस्थानों की जवाबदेही, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति जैसे विषय नई राजनीतिक व्यवस्था के लिए अहम रहेंगे।
सर्बिया का यह चुनाव दिखाता है कि लंबे समय तक चलने वाला छात्र आंदोलन चुनावी राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब देश की नजर सरकार गठन और आने वाले राजनीतिक फैसलों पर रहेगी।