मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच ईरान ने एक बहुत बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने घोषणा की है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक जैसे ‘दोस्त’ देशों के जहाजों के लिए खोल दिया गया है।

दुश्मनों के लिए बंद, दोस्तों के लिए रास्ता साफ

​ईरानी विदेश मंत्री ने साफ किया कि यह समुद्री रास्ता केवल उन्हीं देशों के लिए बंद रहेगा जिन्हें ईरान अपना ‘दुश्मन’ मानता है, विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल। अराघची ने एक बयान में कहा, “होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है। यह केवल उन देशों के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है जो हम पर हमला कर रहे हैं। भारत, चीन और रूस जैसे हमारे रणनीतिक साझेदारों के जहाज यहाँ से सुरक्षित गुजर सकते हैं।”

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?

​भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस के रूप में खाड़ी देशों से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत में एलपीजी (LPG) और पेट्रोल की किल्लत होने का डर सता रहा था। ईरान के इस फैसले से अब भारतीय तेल टैंकर बिना किसी डर के इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे देश में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

दुनिया पर क्या होगा असर?

​दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी हाल ही में इस रास्ते को खोलने की अपील की थी ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट से बचाया जा सके। ईरान ने अब चुनिंदा देशों को अनुमति देकर अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।

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