मध्य प्रदेश में अवैध शराब से जुड़े एक गंभीर मामले में दोषसिद्धि के बावजूद अब तक लाइसेंस निरस्त न होने को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र में संचालित Som Distilleries & Breweries Ltd. के खिलाफ दर्ज मामले में एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक फैसला लंबित है।

क्या है मामला

रिकॉर्ड के अनुसार, कंपनी पर नकली दस्तावेजों के जरिए शराब के अवैध परिवहन का आरोप सिद्ध हुआ था। निचली अदालत ने इस मामले में दोषियों को सजा सुनाई थी। बाद में उच्च न्यायालय ने सजा पर अस्थायी रोक जरूर लगाई, लेकिन दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

कानून की स्पष्ट व्यवस्था

मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के तहत यदि कोई लाइसेंसधारी गंभीर अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जाना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया।

विभागीय प्रक्रिया अटकी

आबकारी विभाग की ओर से कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब भी प्राप्त हो चुका है। इसके बाद जुलाई 2024 में विधिक राय के लिए महाधिवक्ता कार्यालय से परामर्श मांगा गया, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद निर्णय अधर में है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद लाइसेंस निरस्तीकरण में हो रही देरी ने प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में देर होना न केवल कानून की मंशा के खिलाफ है, बल्कि इससे अवैध गतिविधियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलने की आशंका भी बढ़ती है।

आगे क्या?

फिलहाल आबकारी विभाग का कहना है कि विधिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय विधिक सलाह मिलने के बाद लिया जाएगा। वहीं, यह मामला Madhya Pradesh में शराब नीति के क्रियान्वयन और जवाबदेही को लेकर एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है।

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