श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के मुख्य शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज फहराया। यह आयोजन विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर हुआ, जो भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की स्मृति में मनाया जाता है।

ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री ने सप्तमंदिर में दर्शन किए, जहाँ महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी के मंदिर स्थित हैं। इसके बाद उन्होंने शेषावतार मंदिर में भी पूजा की।

ध्वज का आकार 11×22 फीट है और यह मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर फहराया गया। इसमें तीन पवित्र चिन्ह अंकित हैं—ॐ, सूर्य, और कोविदार वृक्ष, जो भगवान राम की शक्ति, वंश और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को “आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नव भारत के सांस्कृतिक आत्मबोध का उद्घोष है।

पूरे अयोध्या नगर को फूलों, दीपों और रोशनी से सजाया गया था। हजारों श्रद्धालु और संत इस आयोजन के साक्षी बने। सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए थे, और लगभग 6,000 आमंत्रित अतिथि समारोह में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “यह ध्वज केवल मंदिर की ऊँचाई नहीं, भारत की आस्था और एकता की ऊँचाई का प्रतीक है।” उन्होंने इसे “रामराज्य की पुनर्स्थापना की दिशा में एक कदम” बताया।

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