मध्यप्रदेश का उमरिया जिला न केवल अपने जंगलों के लिए बल्कि अपनी प्राचीन विरासत और मंदिरों के लिए भी विख्यात है। यहाँ के बिरसिंहपुर पाली में स्थित माता बिरासिनी देवी का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। इतिहास और किंवदंतियों के अनुसार, माता यहाँ 10वीं शताब्दी से विराजमान हैं और उनके प्राकट्य की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है।

रहस्यमयी सपने से हुआ था मंदिर का निर्माण

​कहा जाता है कि माता बिरासिनी देवी का प्राकट्य एक दिव्य और रहस्यमयी स्वप्न के माध्यम से हुआ था। स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार:

  • ​लगभग 10वीं शताब्दी के दौरान, इस क्षेत्र के तत्कालीन शासक को माता ने सपने में दर्शन दिए थे।
  • ​माता ने राजा को एक विशेष स्थान पर अपनी प्रतिमा होने का संकेत दिया और वहां मंदिर निर्माण का आदेश दिया।
  • ​जब खुदाई और खोज की गई, तो माता की अत्यंत आकर्षक और अलौकिक प्रतिमा प्राप्त हुई, जिसे आज हम बिरासिनी देवी के रूप में पूजते हैं।

अद्भुत प्रतिमा और वास्तुकला

​माता बिरासिनी की प्रतिमा अपने आप में विशिष्ट है। मंदिर की संरचना और प्रतिमा की बनावट प्राचीन भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।

  • ​माता को विराजमान मुद्रा में देखा जा सकता है, जो उनके शांत और शक्तिमयी स्वरूप को दर्शाता है।
  • ​प्रतिमा के चारों ओर अन्य देवी-देवताओं की सूक्ष्म नक्काशी की गई है, जो 10वीं शताब्दी की कला शैली को प्रदर्शित करती है।

सिंहस्थ और चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व

​आज (24 मार्च 2026) चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के मद्देनजर भी इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को देखते हुए प्रशासन यहाँ सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से “अखंड ज्योति” प्रज्वलित करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

कैसे पहुँचें बिरसिंहपुर पाली?

​यह मंदिर उमरिया जिले के पाली प्रोजेक्ट टाउन (बिरसिंहपुर) में स्थित है।

  • ट्रेन द्वारा: बिरसिंहपुर (Birsinghpur) रेलवे स्टेशन मुख्य स्टेशन है जो कटनी और बिलासपुर रेल खंड पर स्थित है।
  • सड़क द्वारा: उमरिया और शहडोल से यह सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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