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International

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन, वैश्विक नेताओं ने जताया शोक

· December 30, 2025 · 2 मिनट पढ़ें

बांग्लादेश की राजनीति की मजबूत और प्रभावशाली नेता, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने ढाका में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं खालिदा जिया के निधन से बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में शोक की लहर है।
खालिदा जिया बांग्लादेश की उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थीं, जिन्होंने देश की राजनीति को दशकों तक दिशा दी। वह दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान देश ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूती देने की दिशा में कई अहम पड़ाव देखे।

खालिदा जिया का नाम बांग्लादेश की राजनीति में दृढ़ नेतृत्व, निर्णायक फैसलों और सत्ता व विपक्ष के बीच कड़े संघर्ष के लिए जाना जाता है। उनका राजनीतिक जीवन चुनौतियों, विवादों और जनसमर्थन से भरा रहा। समर्थकों के लिए वह लोकतंत्र की आवाज़ थीं, जबकि आलोचकों के अनुसार उनकी राजनीति टकरावपूर्ण रही। इसके बावजूद, उनके योगदान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

खालिदा जिया के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
भारत के प्रधानमंत्री ने उन्हें एक अनुभवी राजनेता बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत–बांग्लादेश संबंधों के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दक्षिण एशिया के कई नेताओं ने खालिदा जिया को एक प्रभावशाली महिला नेता के रूप में याद किया, जिन्होंने पुरुष-प्रधान राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई नेताओं और संगठनों ने उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उनके योगदान को ऐतिहासिक बताया।

खालिदा जिया के निधन की खबर फैलते ही बांग्लादेश में उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। BNP नेताओं ने उन्हें पार्टी की आत्मा बताते हुए कहा कि उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है। पार्टी मुख्यालय सहित कई जगहों पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया।

खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका जीवन संघर्ष, सत्ता, विपक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की कहानी रहा। आने वाले समय में भी उनका नाम बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में याद किया जाता रहेगा।

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